कांग्रेस कवर करने वाले पत्रकारों का कहना है कि प्रियंका चतुर्वेदी
मथुरा से आती हैं लेकिन उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि महाराष्ट्र से जुड़ी हुई
है और वह मुंबई उत्तर-पश्चिम से लोकसभा चुनाव लड़ने की इच्छा रखती थीं.
हालांकि कांग्रेस ने वहां से इस बार संजय निरुपम को उम्मीदवार बनाया है.
मुंबई उत्तर-पश्चिम से पूर्व मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष गुरुदास कामत सांसद रहे हैं और प्रियंका चतुर्वेदी पहले कामत की टीम में भी काम कर चुकी हैं.
पत्रकारों का यह भी मानना है कि मुंबई उत्तर-पश्चिम से सीट फ़ाइनल होने के बाद प्रियंका मथुरा से चुनाव लड़ने की इच्छा रखती थीं लेकिन वहां से कांग्रेस ने महेश पाठक को उम्मीदवार बना दिया.
विश्लेषकों का कहना है कि प्रियंका इन सबसे अधिक तब ख़फ़ा हुईं जब उनसे कथित तौर पर दुर्व्यवहार करने वाले कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ कार्रवाई को वापस ले लिया.
उमेश पंडित कहते हैं कि प्रियंका मथुरा से चुनाव लड़ना चाहती थीं इसी कारण वह ग़ुस्से में हैं और ऐसे समय में जब 18 अप्रैल को मथुरा में वोटिंग है तब उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था.
सतविंदर की पत्नी ने बीबीसी हिन्दी के रेडियो संपादक राजेश जोशी से बात कहते हुए कहा, "हम नहीं जानते कि शव को लेकर क्या किया जाए. सरकार में कोई भी हमारी बात नहीं सुनता."
सीमा ने बताया, "हमारी आख़िरी बार 21 फ़रवरी को बात हुई थी और उस समय मेरे पति को मिलने वाली सज़ा के बारे में कुछ भी पता नहीं था."
13 साल की एक बेटी की मां सीमा कहती हैं, "अभी तक सरकार की ओर से उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई और न ही किसी अधिकारी ने कोई बात की. कुछ लड़कों ने जब बताया तो हमने ख़ुद ईमेल मंगाया."
हालांकि सतविंदर सिंह और हरजीत सिंह को 28 फ़रवरी को ही मौत की सज़ा दे दी गई थी लेकिन परिजनों को इस बारे में सोमवार को बताया गया.
सीमा रानी ने कहा कि 'दो साल तक चिट्ठी आती रही और फ़ोन पर बात होती रही लेकिन अचानक बातचीत बंद हो गई. जब कई महीने बीत गए तो गांव के ही एक किसी ने बताया कि वो किसी मामले में जेल में बंद हैं.'
सीमा के वकील विजय का कहना है कि 28 फ़रवरी को जेल से ही किसी का फ़ोन आया और उसने कहा कि 'सतविंदर को मौत की सज़ा दे दी गई है.'
बीबीसी पंजाबी संवाददाता अरविंद छाबड़ा ने वकील विजय से बात की. विजय कहना है कि सीमा और अन्य परिजनों को तब इस बात पर विश्वास नहीं हुआ था.
विजय बताते हैं कि सीमा के परिजनों ने जब विदेश मंत्रालय से सम्पर्क किया तो उन्हें भी पता नहीं था.
इसके बाद विजय ने हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की और मांग रखी कि विदेश मंत्रालय को इन व्यक्तियों के बारे में जानकारी पता करने को कहा जाए.
उन्होंने बीबीसी को बताया कि बीते सोमवार को मंत्रालय की ओर से एक मेल कर मौत की पुष्टि की और कहा कि दोनों सऊदी अरब में ड्राइवर थे और उन्हें 28 फ़रवरी को मौत की सज़ा दी जा चुकी है.
साल 2013 में होशियारपुर के सतविंदर कुमार और लुधियाना के हरजीत सिंह वर्क परमिट पर सऊदी अरब गए थे.
मुंबई उत्तर-पश्चिम से पूर्व मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष गुरुदास कामत सांसद रहे हैं और प्रियंका चतुर्वेदी पहले कामत की टीम में भी काम कर चुकी हैं.
पत्रकारों का यह भी मानना है कि मुंबई उत्तर-पश्चिम से सीट फ़ाइनल होने के बाद प्रियंका मथुरा से चुनाव लड़ने की इच्छा रखती थीं लेकिन वहां से कांग्रेस ने महेश पाठक को उम्मीदवार बना दिया.
विश्लेषकों का कहना है कि प्रियंका इन सबसे अधिक तब ख़फ़ा हुईं जब उनसे कथित तौर पर दुर्व्यवहार करने वाले कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ कार्रवाई को वापस ले लिया.
उमेश पंडित कहते हैं कि प्रियंका मथुरा से चुनाव लड़ना चाहती थीं इसी कारण वह ग़ुस्से में हैं और ऐसे समय में जब 18 अप्रैल को मथुरा में वोटिंग है तब उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था.
सऊदी अरब में दो भारतीयों का सिर कलम कर दिया गया है. दोनों भारतीय पंजाब के थे और वो वर्क परमिट पर वहां काम कर रहे थे.
इसकी
पुष्टि करते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक पत्र में कहा कि होशियारपुर
के सतविंदर और लुधियाना के हरजीत सिंह को 28 फ़रवरी को मौत की सज़ा दी गई.
सतविंदर की पत्नी ने बीबीसी हिन्दी के रेडियो संपादक राजेश जोशी से बात कहते हुए कहा, "हम नहीं जानते कि शव को लेकर क्या किया जाए. सरकार में कोई भी हमारी बात नहीं सुनता."
सीमा ने बताया, "हमारी आख़िरी बार 21 फ़रवरी को बात हुई थी और उस समय मेरे पति को मिलने वाली सज़ा के बारे में कुछ भी पता नहीं था."
13 साल की एक बेटी की मां सीमा कहती हैं, "अभी तक सरकार की ओर से उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई और न ही किसी अधिकारी ने कोई बात की. कुछ लड़कों ने जब बताया तो हमने ख़ुद ईमेल मंगाया."
हालांकि सतविंदर सिंह और हरजीत सिंह को 28 फ़रवरी को ही मौत की सज़ा दे दी गई थी लेकिन परिजनों को इस बारे में सोमवार को बताया गया.
सीमा रानी ने कहा कि 'दो साल तक चिट्ठी आती रही और फ़ोन पर बात होती रही लेकिन अचानक बातचीत बंद हो गई. जब कई महीने बीत गए तो गांव के ही एक किसी ने बताया कि वो किसी मामले में जेल में बंद हैं.'
सीमा के वकील विजय का कहना है कि 28 फ़रवरी को जेल से ही किसी का फ़ोन आया और उसने कहा कि 'सतविंदर को मौत की सज़ा दे दी गई है.'
बीबीसी पंजाबी संवाददाता अरविंद छाबड़ा ने वकील विजय से बात की. विजय कहना है कि सीमा और अन्य परिजनों को तब इस बात पर विश्वास नहीं हुआ था.
विजय बताते हैं कि सीमा के परिजनों ने जब विदेश मंत्रालय से सम्पर्क किया तो उन्हें भी पता नहीं था.
इसके बाद विजय ने हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की और मांग रखी कि विदेश मंत्रालय को इन व्यक्तियों के बारे में जानकारी पता करने को कहा जाए.
उन्होंने बीबीसी को बताया कि बीते सोमवार को मंत्रालय की ओर से एक मेल कर मौत की पुष्टि की और कहा कि दोनों सऊदी अरब में ड्राइवर थे और उन्हें 28 फ़रवरी को मौत की सज़ा दी जा चुकी है.
साल 2013 में होशियारपुर के सतविंदर कुमार और लुधियाना के हरजीत सिंह वर्क परमिट पर सऊदी अरब गए थे.
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